इंजेक्शन द्वारा निकाले बाजारू दूध की हृदय विदारक सच्चाई

बाजारू दूध और दुग्ध उत्पाद का उपभोग करने वाले गो हत्या में सबसे बड़े सहभागी हैं ।

    जी हाँ यह एक कटु सत्य है ।

    # आइये   जानते   हैं   कैसे #

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** अधिकांश बाजारू दूध आक्सीटोसिन हार्मोन का इंजेक्शन देकर निकाला जाता है 

**हार्मोन का इंजेक्शन दी हुई गाय दुबारा दूध देने लायक नहीं रह जाती अर्थात बांझ हो जाती है और अंततः बिक्री दर बिक्री बूचरखानो में पहुंचा दी जाती है 

**इस प्रकार इंजेक्शन द्वारा निकाले दूध और दुग्ध उत्पादों का उपभोग करने वाले हम लोग जाने अनजाने गो हत्या के महापाप में सहभागी बनते जाते हैं ।

 

**चिकित्सा जगत में आक्सीटोसिन हार्मोन का इंजेक्शन कभी कभी गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा कम करने के लिए गर्भाशय के प्रसार हेतु दिया जाता है ।

**इस इंजेक्शन के प्रभाव से गाय का पूरा दूध निकाल लिया जाता है और गाय का बाछा या बाछी थन के दूध के अभाव में एक या दो मास में ही मर जाता है ।

**इंजेक्शन देकर दूध निकालते निकालते गाय का गर्भाशय इतना बढ़ जाता है कि गाय आठ दस माह में ही बांझ बन जाती है और गो हत्यारे को बेंच दी जाती है 

** एक अनुमान के अनुसार केवल कलकत्ता में ही प्रतिवर्ष कम से कम पांच लाख गो वंश का वध किया जाता है ।पूरे भारत में प्रतिवर्ष करोड़ों गो वंश का वध किया जाता है ।

 

** दूध मुख्य रूप से बच्चों का आहार होता है वह भी केवल तीन या चार वर्ष तक ।

** आज तो पूरी दुनिया मान गयी है कि बच्चों के लिए केवल मां का दूध ही सर्वश्रेष्ठ होता है और हर डिब्बाबंद दूध के ऊपर यह लिखा भी होता है । 

**चार वर्ष के बाद भी यदि किसी बच्चे को ऊपरी दूध देने की आवश्यकता पड़े तो उसे इंजेक्शन रहित देशी गाय का ही दूध देना चाहिए ।

** दुनिया में केवल मनुष्य ही ऐसा जानवर है जो दूसरे जानवर के दूध का उपभोग करता है जबकि किसी भी मां का दूध केवल उसके बच्चों के पोषण के लिए ही होता है हमारे और आपके उपभोग के लिए नहीं 

**ध्यान रहे इंजेक्शन द्वारा निकाले दूध और दुग्ध उत्पादों के उपभोग का सर्वाधिक दुष्प्रभाव बच्चों पर ही होता है ।

** आक्सीटोसिन हार्मोन के दुष्प्रभाव से बच्चे समय से पहले ही जवान होने लगते हैं और जब उनकी युवावस्था आती है तब वे नपुसंकता,मोटापा  और मंदबुद्धि के शिकार हो जाते हैं और उनका भावी जीवन एक प्रश्नचिन्ह बन जाता है ।

**बाजारू दूध का दूसरा सर्वाधिक प्रयोग आजकल चाय, काफी, मिठाई, आइस्क्रीम, चीज, पनीर तथा मक्खन के रूप में होता है परंतु चूंकि दूध आक्सीटोसिन हार्मोन का इंजेक्शन देकर निकाला जाता है इसलिए यह सर्वथा रोगों का कारण बनता है ।

** इसीलिए आजकल नाना प्रकार की जीवन शैली जनित बीमारियों पैदा हो रही हैं जैसे मधुमेह,  मोटापा, हृदय रोग, पेट के रोग, कैंसर आदि ।

 

** जर्सी का ए-1 दूध तो एक प्रकार के हानिकारक तत्व बीटाकैसोमार्फीन-7 से युक्त होता है जो आटिज्म और सीजोफ्रोनिया जैसे घातक रोग का कारण बनता है । यह बात आज पूरी दुनिया में अनुसंधान के द्वारा सिद्ध हो चुकी है ।

** गो हत्या में सहभागी होने से बचे रहने का एकमात्र उपाय है गो संवर्धन अर्थात किसान को गोदान द्वारा गोपालन का विशेष प्रोत्साहन ।

** किसान को दान में दी हुई गाय को अपनी गाय समझ कर उसके पालन पोषण में संपूर्ण सहयोग प्रदान करना ।

** गाय किसान के खूंटे पर आजीवन बंधी रहे ऐसी व्यवस्था करना चाहिए ।

** किसान के खूंटे पर गाय आजीवन बंधी रहेगी तो किसान के खेत में गो आधारित कृषि संस्कृति का विस्तार होगा । पेड़ पौधों का विस्तार होगा ।

** गो  संपदा का विस्तार होगा 

एक गाय  से दस वर्ष में बारह से पंद्रह गाय का विस्तार हो जाता है ।

** हमें याद रखना चाहिए कि भारत का लगभग अस्सी प्रतिशत गो वंश  समाप्त हो चुका है और इसकी वंश वृद्धि गो संवर्धन द्वारा ही की जा सकती है ।

** यदि ऐसा न हुआ तो गो माता धीरे-धीरे संपूर्ण भारत  से निश्चिन्ह हो जायेगी ।

**इसलिए अभी भी समय है 

* हम लोग बाजारू दूध के उपभोग से बचें ।

* गोसेवा परिवार से जुड़ कर किसी किसान के परिवार को गोद लें ।

*किसान के घर के आसपास फलदार वृक्ष लगाने में सहभागी बने ।

     यदि ऐसा न हुआ तो भावी पीढियाँ कई प्रजन्मों तक हमें माफ नहीं करेंगी और हमें कोसती रहेंगी ।

जय गो माता । जय भारत माता 

– प्रस्तुति-

डॉ  बिन्देश्वरी प्रसाद सिंह  

सीडी-241, सेक्टर-1

साल्टलेक, कलकत्ता ।

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1 Comment

  1. If we don’t find the Desi Cow milk so no need to drink milk its better to live without milk.

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