
भारत में लगभग 20,000 गोशालाएँ हैं, जिनमें से अधिकांश गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। दैनिक संचालन एवं गोसेवा के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण गोवंश की उचित देखभाल भी नहीं हो पा रही है। केवल दान पर आधारित व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ सिद्ध नहीं हो रही है, जिससे गोशालाओं के सामने अस्तित्व का प्रश्न खड़ा हो गया है।
भारत में लगभग 14 करोड़ देशी गोवंश है जिसमें 5 प्रतिशत से भी कम गोशालाओं में है। अधिकांश गोवंश किसानों के पास है। 14 करोड़ किसान परिवार है, परन्तु रासायनिक खेती, पाश्चात्य जीवनशैली तथा गोपालन के लाभ के प्रति अज्ञानता के कारण किसान अपना गोवंश बेच रहा या छोड़ रहा है। परिणामस्वरूप प्रतिवर्ष तीन करोड़ गोवंश की हत्या हो रही है जिससे गोवंश के अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है।

यदि गोशालाओं में गोबर एवं गोमूत्र का सम्पूर्ण एवं व्यावसायिक उपयोग किया जाए, तो वे दान पर निर्भर रहने के बजाय आय सृजन एवं ग्राम विकास के केंद्र बन सकती हैं।
गोबर से जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, बायोगैस तथा अन्य उपयोगी उत्पाद एवं गोमूत्र से फसल रक्षक, जैविक उर्वरक तथा विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इससे गोशाला की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और समाज के सामने यह उदाहरण स्थापित होगा कि गाय केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि समृद्धि एवं स्वावलंबन का आधार है।
गो-आधारित ग्राम विकासकेवल गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समस्त गोवंश की रक्षा संभव नहीं है। गाय का वास्तविक घर गाँव और किसान का आँगन है। इसलिए प्रत्येक गोशाला को अपने आसपास के किसानों तक पहुँचना होगा और उन्हें गोपालन, गोबर एवं गोमूत्र के महत्व तथा उससे होने वाले आर्थिक लाभों की जानकारी देनी होगी।
जब किसान समझेगा कि गाय उसके खेत, परिवार और आय का आधार बन सकती है, तब वह अपने गोवंश को बेचने के बजाय उसका संरक्षण और संवर्धन करेगा। इससे किसानों की खेती की लागत घटेगी, भूमि की उर्वरता बढ़ेगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और गाँव आत्मनिर्भर बनेंगे।

गोशाला स्वावलंबन एवं गोआधारित ग्राम विकास का यह कार्य अपने आप नहीं होगा। इसके लिए समर्पित, प्रशिक्षित एवं योग्य कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है जो गोशालाओं में रहकर इस मॉडल को स्थापित कर सकें तथा किसानों के बीच जाकर इसे विस्तार दे सकें।
आज देश में ऐसे प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की संख्या नगण्य है। इसलिए इस क्षेत्र में कार्य विस्तार की सबसे बड़ी आवश्यकता है — प्रशिक्षित कार्यकर्ता।
किसी भी बड़े परिवर्तन का आधार प्रशिक्षित मानव शक्ति होती है। बिना प्रशिक्षण के योग्य कार्यकर्ता तैयार नहीं हो सकते और बिना कार्यकर्ताओं के कोई भी अभियान सफल नहीं हो सकता।
आज जिस प्रकार कंप्यूटर, कृषि, उद्योग, चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में कार्य विस्तार के लिए प्रशिक्षण संस्थानों की आवश्यकता पड़ी, उसी प्रकार गोशाला स्वावलंबन एवं गोआधारित ग्राम विकास के लिए भी प्रभावी प्रशिक्षण व्यवस्था की आवश्यकता है।
देश की 20,000 गोशालाओं और 14 करोड़ किसान परिवारों तक इस कार्य को पहुँचाने के लिए हजारों नहीं, बल्कि लाखों प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की आवश्यकता होगी। ऐसे कार्यकर्ताओं को तैयार करने का सबसे प्रभावी और स्थायी माध्यम है—सुसंगठित, व्यवहारिक एवं परिणामोन्मुख प्रशिक्षण। दुर्भाग्यवश समाज में ऐसे प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को तैयार करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसी कमी को पूरा करने के का प्रयास गोसेवा परिवार कर रहा है।
गोसेवा परिवार की स्थापना वर्ष 2014 में कोलकाता में हुई। स्थापना के बाद से ही संस्था ने गोबर-गोमूत्र आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य किया है।
पिछले एक दशक में गोसेवा परिवार ने पश्चिम बंगाल के 2,000 से अधिक गाँवों में पहुँचकर 25,000 से अधिक किसानों को गोबर-गोमूत्र के उपयोग, गोआधारित खेती तथा गोपालन के महत्व का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया है। इन प्रयासों के अत्यंत सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अनेक प्रशिक्षित किसानों ने अपने गोवंश को कभी न बेचने का संकल्प लिया, जबकि अनेक परिवारों ने पुनः गोपालन प्रारम्भ किया। इससे यह सिद्ध हुआ कि जब किसान को गाय का आर्थिक, कृषि एवं सामाजिक महत्व समझाया जाता है, तो वह स्वेच्छा से गोपालन की ओर अग्रसर होता है।
किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना गोसेवा परिवार की विशेष उपलब्धि रही है। इसके लिए प्रशिक्षकों एवं कार्यकर्ताओं के निर्माण हेतु प्रशिक्षण चलता रहता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षक अधिक से अधिक किसानों तक गोबर-गोमूत्र का ज्ञान पहुँचा सके।

गोसेवा परिवार को विभिन्न गोशालाओं के साथ कार्य करने तथा उनके प्रबंधन, प्रशिक्षण एवं विकास में सहयोग देने का भी व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ है। अनेक गोशालाओं में जाकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहाँ गोबर-गोमूत्र प्रबंधन, गोशाला संचालन, गोआधारित खेती तथा आत्मनिर्भरता के विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

इतने वर्षों के अनुभव से एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि अधिकांश गोशालाओं को ऐसे सक्षम एवं प्रशिक्षित व्यक्तियों की आवश्यकता है जो गोशाला का प्रभावी संचालन कर सकें, गोबर-गोमूत्र का वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक प्रबंधन कर सकें तथा गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर सकें। दुर्भाग्यवश समाज में ऐसे प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को तैयार करने की कोई प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं है।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए गोसेवा परिवार ने एक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की है जहाँ नियमित रूप से प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है, ताकि देशभर में बड़ी संख्या में लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें, गोशालाओं और किसानों के बीच सेतु बन सकें तथा गोमाता, किसान और गाँव—तीनों के उत्थान में अपना योगदान दे सकें।

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया क्षेत्र में प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर शांत एवं रमणीय वातावरण के बीच स्थित गोसेवा परिवार प्रशिक्षण केंद्र गोशाला स्वावलंबन एवं गोआधारित ग्राम विकास के क्षेत्र में एक समर्पित प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र है।
हरियाली, स्वच्छ वातावरण और ग्रामीण परिवेश से घिरा यह केंद्र प्रशिक्षणार्थियों को प्रकृति के सान्निध्य में रहकर व्यावहारिक एवं अनुभवात्मक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। यहाँ गोपालन, गोशाला प्रबंधन, गोबर एवं गोमूत्र आधारित उत्पाद निर्माण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जैविक खाद एवं फसल रक्षक निर्माण, बायोगैस, ग्राम उद्यमिता तथा आत्मनिर्भर ग्राम विकास से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण देने के आवश्यक सभी व्यवस्थाएं खड़ी की गई है।
"गोशाला स्वावलंबन से ग्राम स्वावलंबन" के संकल्प के साथ यह केंद्र राष्ट्र, ग्राम और गौसेवा के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं के निर्माण का एक सशक्त माध्यम बन रहा है। प्रशिक्षण केंद्र का वीडियो देखने के लिए Video Click करें।
कोलकाता 200 km. रांची 200 km.
खड़गपुर 90 km. टाटा जमशेदपुर 80 km.
झाड़ग्राम 35 km. घाटशिला 35 km.
18478 / 18477 Kalinga Utkal Express (Puri - Yog Nagari Rishikesh)
12813 / 12814 Steel Express (Howrah - Tatanagar)
12872 / 12871 Ispat Express (Howrah - Kantabanji / Titlagarh)
18615 / 18616 Kriya Yoga Express (Howrah - Hatia)
18030 / 18029 Shalimar - Mumbai LTT Express
22891 / 22892 Howrah - Ranchi Intercity Superfast Express
22861 / 22862 Kantabanji - Howrah Ispat Express
टाटा से खड़गपुर के बीच लोकल ट्रेन सुबह 2 और शाम को 3

इस प्रशिक्षण केंद्र में आदरणीय श्री सुनील मानसिंहका जी के प्रेरणादायी मार्गदर्शन एवं संरक्षण में अनुभवी, प्रशिक्षित एवं विषय-विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। वर्षों के अनुभव एवं क्षेत्रीय कार्यों के आधार पर प्रशिक्षणार्थियों को गोशाला स्वावलंबन, गोआधारित ग्राम विकास, प्राकृतिक खेती तथा गोबर-गोमूत्र आधारित उद्यमिता की व्यवहारिक शिक्षा दी जाती है।
केंद्र का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है कि "जो सिखाया जाए, उसे पहले स्वयं जीवन में अपनाया जाए।" इसलिए हमारे शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं देते, बल्कि गोपालन, प्राकृतिक खेती, गोबर-गोमूत्र आधारित उत्पाद निर्माण एवं ग्राम विकास के अपने प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
इसी कारण प्रशिक्षणार्थियों को केवल जानकारी नहीं, बल्कि सिद्ध, व्यवहारिक एवं सफल अनुभव प्राप्त होते हैं, जिससे वे प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद आत्मविश्वास के साथ अपने क्षेत्र में कार्य कर सकें।
गोसेवा परिवार द्वारा संचालित इस अभियान में गौभक्तों, युवाओं, किसानों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को "गोशाला स्वावलंबन" एवं "गोआधारित ग्राम विकास" का व्यापक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। प्रशिक्षण का मूल आधार गोबर एवं गोमूत्र आधारित अर्थव्यवस्था है, जिसके माध्यम से गोशालाओं, किसानों तथा गाँवों को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया जाता है।
यह प्रशिक्षण केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन और समाज में परिवर्तन लाने की एक व्यवहारिक प्रक्रिया है। प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक विषय का सैद्धांतिक अध्ययन, प्रत्यक्ष प्रदर्शन तथा व्यावहारिक अभ्यास कराया जाता है, जिससे शिक्षार्थी अपने क्षेत्र में सफलतापूर्वक इन गतिविधियों को संचालित कर सकें।
| 1. गोशाला प्रबंधन | 8. गोआधारित घरेलू उत्पाद |
| 2. गोशाला स्वावलंबन | 9. गोआधारित ऊर्जा |
| 3. गोपालन | 10. जल संरक्षण |
| 4. गो-चिकित्सा | 11. बीज संरक्षण |
| 5. भारतीय गोवंश का नस्ल सुधार | 12. अग्निहोत्र |
| 6. गोआधारित कृषि | 13. बाल-गोकुलम (नई पीढ़ी को गोसंस्कृति से जोड़ना) |
| 7. गोआधारित मानव चिकित्सा | 14. विपणन |
गोसेवा परिवार द्वारा आयोजित 21 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर पूर्णतः निःशुल्क है। प्रशिक्षणार्थियों के लिए सात्विक भोजन तथा मूलभूत सुविधाओं से युक्त आवास की व्यवस्था की जाती है।

प्रशिक्षण की दिनचर्या प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक संचालित होती है। अनुशासन, समयबद्धता एवं कार्यसंस्कृति प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण भाग हैं। इस प्रशिक्षण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सैद्धांतिक ज्ञान की अपेक्षा व्यावहारिक प्रशिक्षण पर अधिक बल दिया जाता है। शिक्षार्थियों को गोपालन, गोशाला प्रबंधन, गोबर-गोमूत्र आधारित उत्पाद निर्माण, जैविक खाद एवं फसल रक्षक निर्माण, प्राकृतिक खेती तथा ग्राम विकास से जुड़े कार्यों का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया जाता है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों के बीच जाकर कार्य करने एवं उन्हें प्रशिक्षण देने का भी अवसर दिया जाता है, जिससे नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल एवं समाज के साथ कार्य करने की समझ विकसित होती है। साथ ही उत्पाद निर्माण के साथ-साथ उनके विपणन एवं बिक्री का भी व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

✔ गोशालाओं को गोबर-गोमूत्र आधारित मॉडल पर आत्मनिर्भर बनाने में सक्षम होंगे।
✔ गोबर एवं गोमूत्र आधारित उपयोगी एवं आयवर्धक उत्पादों का निर्माण कर सकेंगे।
✔ किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती का प्रशिक्षण दे सकेंगे।
✔ ग्राम स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर विकसित कर सकेंगे।
✔ गोआधारित ग्राम विकास एवं ग्राम स्वावलंबन के अभियान का नेतृत्व कर सकेंगे।

** नोट **: ध्यान रहे कि यह किसी प्रकार की शासकीय या निजी योजना सम्बंधित नौकरी नहीं है। यह हमारी स्वयंसेवी संस्था द्वारा आयोजित आत्मनिर्भर गोशाला से गोआधारित गांव की ओर अभियान के अंतर्गत संचालित है।
यदि आपके पास कोई योग्य व्यक्ति हो तो उसे प्रशिक्षण के लिए भेजें
सभी गोशाला संचालकों, पदाधिकारियों एवं गौभक्तों से हमारा विनम्र आग्रह है कि वे एक बार हमारे प्रशिक्षण केंद्र में अवश्य पधारें तथा गोशाला स्वावलंबन एवं गोआधारित ग्राम विकास के इस अभियान को निकट से समझें।
हमारा विश्वास है कि जब गोशालाएँ गोबर-गोमूत्र आधारित आत्मनिर्भरता के मार्ग पर आगे बढ़ेंगी और किसानों को गोपालन से जोड़ेंगी, तभी गोवंश संरक्षण का स्थायी समाधान संभव होगा।
आइए, इस अभियान को देखें, समझें और अपने क्षेत्र में इसके विस्तार के सहभागी बनें।
गोसेवा परिवार प्रशिक्षण केंद्र में आपका हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन है। "आइए, मिलकर आत्मनिर्भर गोशाला एवं आत्मनिर्भर गाँव के निर्माण का संकल्प लें।"
1. योग्य व्यक्तियों को प्रशिक्षण हेतु प्रेरित करें
अपने क्षेत्र के गौभक्तों, युवाओं, किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं सेवा-भावी व्यक्तियों को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दें, ताकि वे प्रशिक्षण प्राप्त कर गोशाला, गाय, गाँव और स्वयं के जीवन को आत्मनिर्भर बनाने के इस अभियान से जुड़ सकें।
2. गोशालाओं को इस योजना से जोड़ें
अपने संपर्क की गोशालाओं को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दें, ताकि वे प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को अपनी गोशालाओं में नियुक्त कर गोबर-गोमूत्र आधारित स्वावलंबन का मॉडल विकसित कर सकें। ऐसे कार्यकर्ता न केवल गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने में सहायता करेंगे, बल्कि आसपास के किसानों को भी गोपालन, प्राकृतिक खेती एवं गोआधारित जीवनशैली से जोड़ने का कार्य करेंगे।
3. प्रशिक्षण हेतु सहयोग करें
प्रतिभागियों के लिए यह प्रशिक्षण पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है, ताकि आर्थिक कारणों से कोई भी इच्छुक व्यक्ति प्रशिक्षण से वंचित न रहे। प्रशिक्षण, आवास, भोजन, अध्ययन सामग्री एवं अन्य व्यवस्थाओं का संपूर्ण व्यय गोभक्तों एवं दानदाताओं के सहयोग से वहन किया जाता है। एक प्रतिभागी को 21 दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान करने का औसत खर्च लगभग 15,000 आता है। आप एक या अधिक प्रतिभागियों के प्रशिक्षण का सहयोग कर इस अभियान में सहभागी बन सकते हैं। गोसेवा परिवार 80G एवं CSR के अंतर्गत पंजीकृत है। अतः व्यक्तिगत, संस्थागत एवं कॉर्पोरेट सहयोग का स्वागत है।
एक प्रशिक्षित कार्यकर्ता → एक आत्मनिर्भर गोशाला → सैकड़ों आत्मनिर्भर किसान → समृद्ध एवं स्वावलंबी गाँव → हजारों गोवंश का संरक्षण
आइए, गोशाला स्वावलंबन एवं गोआधारित ग्राम विकास से गोवंश संरक्षण के इस राष्ट्रीय अभियान में सहभागी बनें।
बैंक खाता विवरण
Yesbank (Savings Account)
Account Name : Goseva Parivar
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IFSCode : YESB0001043
Branch : VIP Road, Kolkata
UPI ID : gosevaparivar@yesbank
PAN: AACTG1626Q
80G URN: AACTG1626QF20211
CSR Registration No. : CSR00002272
अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें: 8100330044

एक प्रशिक्षित कार्यकर्ता ही गोशाला को गोबर-गोमूत्र के आधार पर आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ आस-पास के गांव को भी गो-आधारित जीवन से जोड़ सकता है। भारत की 20,000 गौशालाओं को गोबर-गोमूत्र के आधार पर आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षित कार्यकर्ता निर्माण हेतु 21 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाता है।प्रशिक्षण पूर्णतः निःशुल्क है।
प्रशिक्षण में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को गोशालाओं में नियुक्त किया जाता है। योग्यतानुसार प्रतिमाह 15,000/- से 25,000/- मानधन और गोशाला में आवास एवं भोजन की निःशुल्क व्यवस्था होगी।
प्रशिक्षण शिविर से सम्बंधित जानकारी के लिए 7044070606 पर संपर्क करें।
