1) दिनांक 10 सितम्बर से 13 सितम्बर तक : बांकुरा जिले के शिमलापाल खंड के दुबराजपुर अंचल के प्रशिक्षण वर्ग में 1 गाँव से आये हुए 17 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया जिसमें 4 महिलाएं और 6 युवा थे।
2) दिनांक 10 सितम्बर से 13 सितम्बर तक : झारग्राम जिले के झारग्राम खंड के दुधकुंडी अंचल के प्रशिक्षण वर्ग में 1 गाँव से आये हुए 32 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया जिसमें 29 महिलाये और 2 युवा थे।
3) दिनांक 12 सितम्बर से 15 सितम्बर तक : बीरभूम जिला के महादेव बाजार खंड के रामपुर अंचल के प्रशिक्षण वर्ग में 4 गाँवो से हुए 25 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया जिसमें 23 महिलाएं थी।
4) दिनांक 14 सितम्बर से 17 सितम्बर तक : मालदा जिला के हबीबपुर खंड के बैद्यपुर अंचल के प्रशिक्षण वर्ग में 2 गाँवो से आये हुए 50 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया जिसमें 27 महिलाऐं और 15 युवा थें।
5) दिनांक 14 सितम्बर से 17 सितम्बर तक : झारग्राम जिला के झारग्राम खंड के सातमा अंचल के प्रशिक्षण वर्ग में 4 गाँवो से आये हुए 36 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया जिसमें 25 महिलाऐ और 3 युवा थें।
6) दिनांक 15 सितम्बर से 19 सितम्बर तक : बांकुड़ा जिला के खाकरा खंड के राजकाता अंचल के प्रशिक्षण वर्ग में 1 गाँव से आये हुए 26 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया जिसमें 7 महिलाऐ और 2 युवा थें।
7) दिनांक 17 सितम्बर से 20 सितम्बर तक : पुरुलिया जिला के काशीपुर खंड के बर्राह अंचल के प्रशिक्षण वर्ग में 1 गाँवो से आये हुए 36 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें 26 महिलाऐ और 5 युवा थें।
8) दिनांक 19 सितम्बर से 22 सितम्बर तक : बांकुरा जिला के बांकुरा -1 खंड के केंजाकुरा अंचल के प्रशिक्षण वर्ग में 1 गाँव से आये हुए 13 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें 12 महिलाये थीं।
9) दिनांक 19 सितम्बर से 22 सितम्बर तक : कूचबिहार जिला के माथाभाँगा खंड के उछल पुखारी अंचल के प्रशिक्षण वर्ग में 1 गाँव से आये हुए 28 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें 23 महिलाये और 3 युवा थें।
अब तक कुल 220 प्रशिक्षण वर्ग में 1157 गांवो के 4673 किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
गोरक्षा के लिए किसानों को गोबर गोमूत्र का उपयोग सिखाना होगा। इसे सिखाने के लिए अच्छे प्रशिक्षक (पूर्णकालिक) चाहिए। इन प्रशिक्षकों के आजीविका के लिए प्रतिमाह मानधन चाहिए। ऐसे 100 प्रशिक्षकों के मान धन की स्थाई व्यवस्था के लिए गोसेवा परिवार ने 20 करोड़ रुपए का "गोग्राम प्रशिक्षक संरक्षण कोष" बनाने का संकल्प लिया है। आइए गोरक्षा के इस महायज्ञ में हम सभी अपने - अपने सामर्थ्य अनुसार सहभागी बनें।
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