आजकल गाँव में गाय अपने नैसर्गिक मृत्यु से पहले ही कसाईयों को बेच दी जाती है। जिससे अधिकांश गोवंश की मृत्यु कसाईखाने में होती है। गाँव में गाय पूर्ण आयु प्राप्त कर मरती नहीं है। ऐसे में गोग्राम अभियान के प्रशिक्षण प्राप्त किसान दूध नहीं देने वाले गोवंश को भी बेचता नहीं है बल्कि आजीवन उसका सुखपूर्वक पालन पोषण करता है और नैसर्गिक मृत्यु होने पर उन गोवंश को श्रध्दा पूर्वक समाधी दे रहा है। समाधी देने की प्रक्रिया वैज्ञानिक और किसानों के लिए लाभदायक है। पहले किसान मृत गोवंश को ऐसे ही खुले में फ़ेंक दिया करते थे। जिससे दुर्गन्ध और बीमारी फैलती थी। समाधी देने से इस दोनों समस्याओं का समाधान हुआ है और किसानों को उत्तम खाद उपलब्ध होती है। मालदा जिला के बालीटोला ग्राम के प्रशिक्षित गोपालक किसान ने गौ माता की मृत्यु होने पर उन्हें समाधि दी।