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स्वपन सरदार जी ने गोसेवा परिवार से प्रशिक्षण लेने के पश्चात गोबर और गौमूत्र द्वारा खाद और कीटनियन्त्रक तैयार किया। उसका प्रयोग उन्होंने फलियां और मटर के उत्पादन के समय किया। जिसके परिणाम से उनका उत्पादन बढ़ा। जैविक खेती के कारण उनकी लागत कम आयी और लाभ अधिक हुआ। जब उन्होंने इसका प्रयोग शुरू किया तब उनके आस पास के किसान मजाक बना रहे थे। उनका लाभ देख कर उनसे जैविक पद्धति सीखने आने लगे हैं।