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मैंने गोसेवा परिवार से प्रशिक्षण लिया है। मैं पहले खेती में रासायनिक खाद का प्रयोग करता था। प्रशिक्षण में मुझे गोबर और गोमूत्र आधारित जैविक खेती के बारे में सिखाया गया। मैंने अपनी जमीन के 3 कट्ठा में परवल, 5 कट्ठा में तोरु(झींगा) और 8 कट्ठा खीरा गोबर गोमूत्र आधारित खेती की। मेरी लागत का कहरच बहुत कम हुआ और फसल भी पहले जितनी ही हुई। मेरी फसल की गुणवत्ता के कारण मुझे अधिक मूल्य भी मिला है। इस कारण मेरे गाँव के बाकी किसान भी इस पद्धति को सीखने का आग्रह कर रहे हैं।