गो आधारित ग्राम विकास के लिए 16 पंचायतों के 6 प्रशिक्षण वर्गों में 34 गाँवों के 97 किसानों को प्रशिक्षण दिया जिसमें 32 महिलायें थी ।
1) दिनांक 7 FEB से 9 FEB तक : पुरुलिया जिला के अयोध्या पहाड़ अंचल के अयोध्या ग्राम के प्रशिक्षण वर्ग में 11 पंचायत के 14 गावों से आये हुए 7 महिलाओं सहित कुल 18 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।
2) दिनांक 4 FEB से 8 FEB तक : दक्षिण 24 परगना जिला के करंजलि अंचल के रामकृष्णपुर गाँव में प्रशिक्षण वर्ग में 1 पंचायत के 6 गावों से आये हुए 13 महिलाओं सहित कुल 18 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।
3) दिनांक 7 FEB से 10 FEB तक : दक्षिण बीरभूम के खैरासोल करंजलि अंचल के खैरासोल गाँव मेंप्रशिक्षण वर्ग में 1 पंचायत के 1 गाँव से आये हुए 4 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।
4) दिनांक 13 FEB से 16 FEB तक : उत्तर बीरभूम के महादेब बाजार खंड के रामपुर अंचल के गाँव के प्रशिक्षण वर्ग में 1 पंचायत के 8 गावों से आये हुए 31 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।
5) दिनांक 10 FEB से 14 FEB तक : मुर्शिदाबाद जिला के बेलडांगा खंड के कापसडांगा अंचल के नपुकुर ग्राम के प्रशिक्षण वर्ग में 1 गावों से आये हुए 7 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।
6) दिनांक 10 FEB से 14 FEB तक : दक्षिण 24 परगना के मगराहाट-1 खंड के घनश्यामपुर ग्राम के प्रशिक्षण वर्ग में 4 गावों से आये हुए 19 महिला किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।

अबतक कुल 657 गाँव के 2189 किसानों को प्रशिक्षित किया गया है।
इन्हें गोबर गोमूत्र के आर्थिक सदुपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। दूध नही देने वाले गोवंश को कसाई के हाथों बिकने से बचाने के लिए किसानों को गोबर-गौमूत्र की उपयोगिता जैसे गो-आधारित कृषि, खाद, फसलरक्षक, दंतमंजन, उबटन, गोबरगैस, गोबर से धूपबत्ती, दीपक इत्यादि उत्पादन करना सिखाया जाता है। किसानों को इन बातों को जीवन मे धारण करने, अन्य लोगों को सिखाने तथा गोवंश को नहीं बेचने का संकल्प करवाया जाता है।
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